रक्षाबंधन

रक्षाबंधन / राखी कब है ? 

Rakshabandhan / Rakhi kab hai ? 

इस लेख में निम्न प्रश्नों के उत्तर भी मिलेंगे।

·        रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं?

·        रक्षाबंधन का त्यौहार कैसे मनाते हैं?

·        रक्षाबंधन कब और कैसे शुरू हुआ?

प्रेम का बंधन

·        रक्षाबंधन का सामाजिक तथा धार्मिक महत्व क्या है?

·        रक्षाबंधन से जुड़ी कहानियां?

·        आधुनिक समय में रक्षाबंधन का बदलता स्वरूप?


प्रतिवर्ष श्रवण (सावन)  मास की पूर्णिमा को राखी बनाई जाती है। इसलिए इसे श्रावणी भी कहते हैं। यह हिंदुओं तथा जैनियों का पवित्र त्यौहार है। पूरे भारतवर्ष में इसे मनाया जाता है। यह त्यौहार नेपाल में भी मनाया जाता है। 

 

रक्षाबंधन मनाने की विधि


रक्षाबंधन भाई बहन के परस्पर प्रेम का त्यौहार है। लड़कियां तथा महिलाएं प्रातः स्नान कर थाली सजाती हैं । पीतल की थाली में राखी, चंदन, दीपक, कुमकुम, हल्दी, चावल, नारियल तथा मिठाई रखी जाती है । अपने इष्ट देव की पूजा के बाद भाइयों को उपयुक्त स्थान पर बैठाया जाता है । सही मुहूर्त पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं । फिर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र या राखी बांध कर उनकी दीर्घायु तथा सफलता की कामना करती हैं। बदले में भाई भी बहनों की सुरक्षा का वचन देते हैं। भाई अपनी बहनों को उपहार या धन देते हैं। विवाहित महिलाएं अपने भाइयों के घर जाकर रक्षाबंधन का त्यौहार मनाती हैं। रक्षाबंधन का रिवाज पूरा होने तक बहने व्रत भी रखती हैं। इस दिन विशेष पकवान बनाए जाते हैं जैसे घेवर, शक्करपारे, नमक पारे, खीर आदि।


अनेक स्थानों पर ब्राह्मण अपने यजमान के हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें सभी कष्टों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए मंत्रोच्चारण भी करते हैं। इस अवसर पर यजमान अपने पुरोहितों को अनाज
, दक्षिणा, फल, मिठाई, वस्त्र आदि देकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। इस दिन मंदिरों में भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। हमारे देश में रक्षाबंधन का धार्मिक आध्यात्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व है।

 


 

राखी से जुड़ी 11 महत्वपूर्ण बातें।

रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं?

रक्षाबंधन कब और कैसे शुरू हुआ?

 विष्णु पुराण के अनुसार एक बार दैत्य राज महाबली ने अपनी भक्ति से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया तथा उनसे यह वरदान मांगा कि वह हमेशा महाबली के सम्मुख रहेंगे। अपने भक्तों की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान विष्णु दैत्य राज बाली के महल में उनकी सुरक्षा में रहने लगे। यह जानकर माता लक्ष्मी बहुत उदास रहने लगी। तब उन्होंने नारद मुनि से ऐसा उपाय बताने के लिए कहा जिससे प्रभु विष्णु वापस वैकुंठ लोक लौट आए। नारद मुनि ने उन्हें जो उपाय बताया उसके अनुसार माता लक्ष्मी बली के पास गई तथा उसने रक्षा सूत्र बांधकर उसे अपना भाई बना लिया। बदले में दैत्य राज बली ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी को सौंप दिया।

·      एक बार असुरों की बढ़ती ताकत को देखकर इंद्र भयभीत हो गए। उन्हें अपनी हार का तथा अपने शासन के खोने का भय सताने लगा। उनकी पत्नी इंद्राणी ने एक रक्षा सूत्र का निर्माण किया तथा देव गुरु बृहस्पति से उस मंत्रित करवाया। उस समय बृहस्पति ने रक्षा सूत्र को मंत्रित करने के लिए जो स्वस्तिवाचन बोला वही रक्षाबंधन का अभीष्ट मंत्र बना। आज भी ब्राह्मण उसी मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने यजमानो के हाथ में रक्षा सूत्र बांधते हैं। इंद्राणी ने अपने पति इंद्र के हाथ में यह रक्षा सूत्र बांधा जिससे उनके भय का अंत हुआ तथा युद्ध में उनकी विजय हुई। ऐसी मान्यता है कि वह दिन श्रवण मास की पूर्णिमा का दिन था।


        रक्षाबंधन से जुड़ा एक प्रसंग महाभारत में भी मिलता है। धर्म की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया। इस युद्ध में उनकी तर्जनी अंगुली में चोट लग गई। उस समय द्रोपदी ने अपनी साड़ी का एक कोना चीर कर उनकी अंगुली पर बांध दिया। भगवान कृष्ण ने द्रोपदी को सुरक्षा का वरदान दिया। वर्षों बाद जब पांडव जुए में द्रोपदी को हार गए तब दुशासन ने उनके चीर हरण का प्रयास किया। इस समय भगवान कृष्ण ने अपने वचन अनुसार द्रोपदी की रक्षा तथा उसकी लाज रखी।

·        300 BC में मेसिडोनिया का राजा एलेग्जेंडर विश्व विजय के लिए निकला। भारत में एक शक्तिशाली राजा पुरु का शासन था। एलेग्जेंडर की पत्नी को राजा पुरु की शक्तियों की जानकारी मिली। वह अपने पति के लिए असुरक्षित महसूस करने लगी। तब भारतीय परंपरा के बारे में पता लगने पर उसने राजा पुरु को एक राखी भेजी तथा अपने पति को हानि ना पहुंचाने की मांग की। राजा पुरु ने अपने वचन का पालन करते हुए युद्ध में सिकंदर को जिंदा छोड़ दिया।

·        राखी से जुड़ी एक घटना आधुनिक इतिहास में भी मिलती है। मेवाड़ का शासन विधवा रानी कर्णावती के हाथ मे था। उसे सूचना मिली कि गुजरात का शासक बहादुर शाह चित्तौड़ पर आक्रमण करने वाला है। उसने मुगल शासक हुमायूं को एक राखी भेज कर सहायता माँगी। हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी राखी को स्वीकार किया तथा रानी कर्णावती को सुरक्षा देने का वचन दिया। हुमायूं की मदद से रानी कर्णावती ने 1533 AD में बहादुर शाह को पराजित किया।

·        भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब अंग्रेजों ने बंगाल को दो भागों में विभाजित कर दिया, तब इसका विरोध करने के लिए सभी लोगों का एकजुट होना आवश्यक था। रविंद्र नाथ टैगोर ने बंग बंग के विरुद्ध लोगों को जागरूक करने के लिए रक्षाबंधन मनाने का आह्वान किया। लोगों ने एक दूसरे को राखी बांधी। इस प्रकार रक्षाबंधन का एक राजनीतिक प्रयोग हुआ।

·        देश के राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री भी राखी का त्यौहार मनाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे राष्ट्रपति भवन तथा प्रधानमंत्री निवास पर जाकर राखी बांधते हैं। यह एक परंपरा बन चुका है।

·        अमरनाथ की यात्रा गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन के दिन पूर्ण होती है। इस दिन अमरनाथ गुफा में हिमानी शिवलिंग भी पूर्ण आकार ले लेता है। अमरनाथ में प्रतिवर्ष इस दिन मेले का आयोजन होता है।

·        महाराष्ट्र में यह त्यौहार थोड़ा अलग तरीके से मनाया जाता है। यहां इसे नारियल पूर्णिमा या श्रावणी भी कहते हैं। इस दिन लोग समुद्र या नदी किनारे एकत्रित होते हैं। लोग अपने पुरानेजनेऊ पानी में प्रवाहित कर देते हैं तथा नए जनेऊ धारण करते हैं। समुद्र की पूजा की जाती है तथा उसे नारियल अर्पित करते हैं।


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राजस्थान में राम राखी बांधने की परंपरा है। इसे केवल भगवान को बांधा जाता है। ननदे अपनी भाभियों को चूड़ा राखी बांधती है इसे भाभी की चूड़ी पर बांधा जाता है।

·        मनुष्य प्रकृति से अलग होकर नहीं रह सकता। हमारे देश में प्रकृति संरक्षण हेतु पेड़ों को कलावा बांधने की पुरानी परंपरा है। बरगद तथा पीपल की पूजा करते हुए भक्त उसके चारों और लाल रंग का कलावा बांधते हैं।

 

आधुनिक समय में रक्षाबंधन का बदलता स्वरूप कैसा है?

1.       आधुनिक नारी आर्थिक और सामाजिक रुप से अधिक स्वतंत्र हो गई है। इसलिए भाइयों से उनकी अपेक्षाएं भी बदल गई है। आज की नारी अपने भाइयों से केवल शारीरिक सुरक्षा की उम्मीद नहीं रखती। बल्कि अपने व्यक्तित्व की रक्षा चाहती हैं। आज लड़कियों को समाज में अपना स्थान बनाने के लिए अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। वह चाहती हैं कि उनके भाई उन बाधाओं को पार करने में उनकी सहायता करें।



2.       बाजार के दबाव में अन्य त्योहारों की तरह रक्षाबंधन भी बहुत महंगा होता जा रहा है। कलावे तथा रेशम के धागे की जगह डिजाइनर राखियों ने ले ली है। आज चांदी तथा सोने की राखियां भी बाजार में उपलब्ध है।



3.       यातायात के आधुनिक साधनों तथा खुले बाजारों के कारण लोगों को दूर देशों में भी काम करने का अवसर मिल रहा है। कई बहनों के भाई दूसरे शहर या दूसरे देश में रहते हैं। ऐसे में प्रतिवर्ष उनके पास तक पहुंचना बहनों के लिए संभव नहीं हो पाता। इन परिस्थितियों में इंटरनेट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इंटरनेट पर ऐसी अनेक वेबसाइट उपलब्ध है जहां पर राखी का आर्डर देने पर मनचाही राखी भाई तक पहुंच सकती है। तथा भाई भी इसी माध्यम से अपनी बहनों को उपहार भेज सकते हैं।

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